प्रकाश – परावर्तन और अपवर्तन
प्रकाश – परावर्तन एवं अपवर्तन
प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है जो हमें अपने आसपास की दुनिया को देखने में सक्षम बनाता है। यह सीधी रेखा में यात्रा करता है और पदार्थ के साथ परस्पर क्रिया करने पर विभिन्न घटनाएँ प्रदर्शित करता है, जैसे परावर्तन, अपवर्तन, वर्ण-विक्षेपण, प्रकीर्णन तथा अवशोषण। इनमें परावर्तन और अपवर्तन सबसे मूलभूत घटनाएँ हैं और दैनिक जीवन के अनेक अनुप्रयोगों का आधार बनती हैं। इस अध्याय में हम अध्ययन करेंगे कि प्रकाश दर्पणों और लेंसों पर पड़ने पर कैसे व्यवहार करता है तथा गणितीय संबंधों की सहायता से बनने वाली प्रतिबिंबों (Images) के गुणों का अनुमान कैसे लगाया जा सकता है।
प्रकाश का परावर्तन
परावर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश किसी चिकनी एवं चमकदार सतह, जैसे दर्पण, से टकराकर वापस लौट जाता है। परावर्तन दो प्रकार का होता है – नियमित (Regular) परावर्तन और विसरित (Diffuse) परावर्तन। नियमित परावर्तन चिकनी सतहों से होता है और स्पष्ट प्रतिबिंब बनने में सहायता करता है, जबकि विसरित परावर्तन खुरदरी सतहों से होता है और वस्तुओं को विभिन्न दिशाओं से दिखाई देने योग्य बनाता है।
परावर्तन के नियम:
- आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है।
- आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब (Normal) एक ही समतल में स्थित होते हैं।
ये नियम समतल दर्पण तथा गोलाकार दर्पण दोनों पर समान रूप से लागू होते हैं।
गोलाकार दर्पण (Spherical Mirrors)
गोलाकार दर्पण एक खोखले गोले का वह भाग होता है जिसकी भीतरी या बाहरी सतह को चमकाकर परावर्तक बनाया जाता है।
- अवतल दर्पण (Concave Mirror): इसकी भीतरी सतह परावर्तक होती है और यह प्रकाश किरणों को अभिसरित (Converge) करता है।
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror): इसकी बाहरी सतह परावर्तक होती है और यह प्रकाश किरणों को अपसारित (Diverge) करता है।
मुख्य शब्दावली:
- ध्रुव (P): दर्पण की परावर्तक सतह का केंद्र बिंदु।
- वक्रता केंद्र (C): मूल गोले का केंद्र।
- मुख्य अक्ष: P और C को जोड़ने वाली रेखा।
- फोकस (F): वह बिंदु जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर किरणें मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं।
- फोकल दूरी (f): PF की दूरी।
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण वस्तु की स्थिति पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि वस्तु वक्रता केंद्र (C) से परे रखी जाए, तो प्रतिबिंब C और F के बीच वास्तविक, उल्टा तथा छोटा बनता है। उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा तथा छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
दूरीयों के बीच संबंध दर्पण सूत्र द्वारा दिया जाता है:
[
\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}
]
जहाँ f = फोकल दूरी, u = वस्तु दूरी तथा v = प्रतिबिंब दूरी।
आवर्धन (Magnification):
[
M = \frac{h_i}{h_o} = \frac{v}{u}
]
अनुप्रयोग: अवतल दर्पणों का उपयोग शेविंग मिरर, वाहन हेडलाइट तथा सौर कुकरों में किया जाता है, जबकि उत्तल दर्पण वाहनों में रियर-व्यू मिरर के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
प्रकाश का अपवर्तन
अपवर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करते समय अपनी गति में परिवर्तन के कारण मुड़ जाता है। जब प्रकाश विरल माध्यम (जैसे वायु) से सघन माध्यम (जैसे काँच) में प्रवेश करता है, तो वह अभिलम्ब की ओर मुड़ता है। इसके विपरीत, जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है, तो वह अभिलम्ब से दूर मुड़ता है।
अपवर्तन के नियम
1. आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा अभिलम्ब एक ही समतल में स्थित होते हैं।
2. स्नेल का नियम (Snell’s Law):
[
\frac{\sin i}{\sin r} = \mu
]
जहाँ i = आपतन कोण, r = अपवर्तन कोण तथा μ = अपवर्तनांक (Refractive Index)।
किसी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश के वेग और उस माध्यम में प्रकाश के वेग के अनुपात के बराबर होता है।
काँच की पट्टी (Glass Slab) से अपवर्तन
जब प्रकाश आयताकार काँच की पट्टी में प्रवेश करता है, तो पहली सतह पर अभिलम्ब की ओर तथा दूसरी सतह पर अभिलम्ब से दूर मुड़ता है। परिणामस्वरूप, निर्गत किरण (Emergent Ray) आपतित किरण के समानांतर होती है, लेकिन उसमें पार्श्व विस्थापन (Lateral Displacement) होता है। इससे सिद्ध होता है कि समानांतर सतहों वाली पट्टी में अपवर्तन प्रकाश का पथ बदलता है, दिशा नहीं।
गोलाकार लेंसों द्वारा अपवर्तन
लेंस एक पारदर्शी माध्यम होता है जिसकी सीमाएँ गोलाकार सतहों से बनी होती हैं।
- उत्तल लेंस (Convex Lens): बीच में मोटा होता है तथा प्रकाश किरणों को अभिसरित करता है।
- अवतल लेंस (Concave Lens): बीच में पतला होता है तथा प्रकाश किरणों को अपसारित करता है।
मुख्य शब्दावली:
- प्रकाशीय केंद्र (O): लेंस का केंद्रीय बिंदु।
- मुख्य अक्ष: प्रकाशीय केंद्र तथा वक्रता केंद्रों से होकर गुजरने वाली रेखा।
- मुख्य फोकस (F): वह बिंदु जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर किरणें अभिसरित होती हैं (उत्तल लेंस) या अपसारित होती हुई प्रतीत होती हैं (अवतल लेंस)।
लेंस सूत्र:
[
\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}
]
आवर्धन:
[
M = \frac{h_i}{h_o} = \frac{v}{u}
]
लेंस की शक्ति (डायोप्टर, D):
[
P = \frac{100}{f(cm)}
]
लेंसों का उपयोग सूक्ष्मदर्शी (Microscope), दूरदर्शी (Telescope), कैमरा, प्रोजेक्टर तथा चश्मों में किया जाता है।
परावर्तन एवं अपवर्तन के व्यावहारिक उपयोग
- अवतल दर्पण: सौर कुकर, वाहन हेडलाइट तथा दंत चिकित्सकों के दर्पण में।
- उत्तल दर्पण: वाहनों में अधिक विस्तृत दृश्य क्षेत्र प्राप्त करने के लिए।
- उत्तल लेंस: आवर्धक काँच, चश्मे तथा विभिन्न प्रकाशीय उपकरणों में।
- अवतल लेंस: निकट दृष्टिदोष (Myopia) के सुधार हेतु।
निष्कर्ष
परावर्तन और अपवर्तन प्रकाश की मूलभूत घटनाएँ हैं जो यह समझाने में सहायता करती हैं कि दर्पणों और लेंसों में प्रतिबिंब कैसे बनते हैं। दर्पण तथा लेंस सूत्रों का उपयोग करके हम प्रतिबिंब के आकार, दिशा तथा प्रकृति का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। ये अवधारणाएँ केवल प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए ही नहीं, बल्कि कैमरा, चश्मा, सूक्ष्मदर्शी और दूरदर्शी जैसे उपकरणों के निर्माण में भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस अध्याय का गहन अध्ययन प्रकाशिकी (Optics) तथा भौतिकी के वास्तविक जीवन अनुप्रयोगों की मजबूत नींव प्रदान करता है।